Introduction of Chattisgarh छत्तीसगढ़ का परिचय

Introduction of Chattisgarh छत्तीसगढ़ का परिचय

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  •  छत्तीसगढ़ का संक्षिप्त परिचय

     

    Introduction of Chattisgarh छत्तीसगढ़ का इतिहास
    HISTORY CHHATTISGRH

     

  •   छत्तीसगढ़ भले ही, 1 नवम्बर 2000 को भारत के नक्शे पर नया राज्य बना हो , पर उसके अतीत और परंपरा की रड़े अनादिकाल से जाकर जुड़ी है।
  •   वैसे भोगौलिक धरातल पर छत्तीसगढ 17.46’एवं 24.05‘ अक्षांश उत्तरी तथा 80.15‘ एवं 84.12‘ देशांतर पूर्वी के मध्य  में है।
  •   दूर से नक्शे पर देखने पर छत्तीेसगढ़ का आकार समुन्द्री घोड़े के के तरह नजर आता है।
  • छत्तीसगढ़ राज्य की सीमाएं सात राज्यों से घिरा हुआ है -उत्तरप्रदेश, झारखण्ड, उड़ीसा, मघ्यप्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, और तेलेगांना आदि।
  •   छत्तीसगढ़ राज्य का भौगोलिक क्षेत्रफल 1.37 लाख वर्ग किलोमीटर है।
  •   छत्तीसगढ़ राज्य में कर्क रेखा राज्य के उपरी चतुष्कोण से गुजरती है।
  •   छत्तीसगढ़ भारत के 16 अन्य राज्यों से बड़ा राज्य है जो कि देश के कुल भू-भाग का 4.4 प्रतिशत है।
  •   छत्तीसगढ़ राज्य के 0.39 लाख वर्ग किलो मीटर भु-भाग पर वन पाया जाता है जो कि कुल क्षेत्रफल का 44 प्रतिशत है।
  •   छत्तीसगढ़ राज्य का उत्तरी तथा दक्षिणी भाग जहां प्राकृतिक संपदा से भरा-पूरा है वहीं मध्य के मैदानी भाग में धान, गेंहू,चना, तथा दलहन तिलहन के उत्पादन में हमारा छत्तीसगढ़ देश में मुख्य स्थान रखता है।
  •   हमारे छत्तीसगढ़ में वन संम्पदा के साथ-साथ लोहा, कोयला, सहित अन्य खनिज संसाधन प्रदेश में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
  • प्राचीन काल में छत्तीसगढ़ के इस भू-भाग को विभिन्न नामेां से  पहचान मिली है छत्तीसगढ़ को दक्षिण कोसल तथा दंडकारण्य के नाम से भी जाना जाता है।
  •   विभिन्न मतों के अनुसार छत्तीसगढ़ केा दक्षिण केसल माता सीता केा मायका और भगवान श्री राम का ननिहाल रहां है।
  •   आज छत्तीसगढ़ का नाम और पहचान उन 36 गढ़ों के तौर पर हुआ है। जो स्वतंत्रता के पहले कभी हुआ करते थे। छत्तीसगढ़ राज्य की वर्तमान पहचान यहां के गढ़ो से मिली है।
  •  देश में दो क्षेत्रों मगध और दक्षिण कौशल केा नामकरण उन क्षेत्रांे में किसी विशेष स्थानों की उपस्थिति के कारण बदल गया।
  •   मगध को बौद्ध विहारों की बहुतायता के कारण बिहार के नाम से जाना गया तो दक्षिण कौशला केा छत्तीस ग्रढ़ों के कारण छत्तीसगढ़ के तौर पर जाना  गया।
  •   राज्य मे जिन छत्तीसगढ़ों के होने की बात कही और मानी जाती है उनमें से कई आज विद्यमान नहीं है अथवा जो है वे भग्न अवस्था में है।
  • छत्तीसगढ़ का गढ़ो का परिचयः-

  •   राज्य के यह गढ़ 18-18 की समान संख्यां में रायपुर और रतनपुर के तत्कालीन शासकों के अधीन थे। तथा इन छत्तीसगढ़ों के नाम इस प्रकार है-
  •   रायपुर के तहत आने वाला गढ़-1.रायपुर, 2.पाटन, 3. सिमगा, 4.सिंगारपुर, 5 लवन, 6.ओमेरा. 7.दुर्ग, 8.सारधा, 9.सिरसा, 10.खल्लारी, 11.मंेहदी 12.सिरपुर, 13 फिंगेश्वर,14.राजिम, 15.सिंघनपुर, 16.सुवरमार, 17 टेंगनागढ़ , अकलतरा।

  •   रतनपुर के तहत आने वाला गढ़-ं 1.रतनपुर, 2.विजयपुर, 3.खरौंद, 4.मारो, 5.कौटगढ़, 6.नवागढ़ ,7.सोंधी, 8.ओखर, 9.पड़रभट्टा,10.सेमरिया, 11.चांपा, 12.लाफा, 13.छुरी, 14.केन्डा, 15.मातीन, 16. उपरोरा, 17.पेण्ड्रा ,18.कुटकुट्टी कन्ड्री।

  •   छत्तीसगढ़ राज्य के प्रतिक चिन्ह में भी 36 गढ़ों के प्रतीकात्मक रूप में गोलाकार में अंकित किया गया है।
  •   1 नवम्बर 2000 केा छत्तीसगढ़ ने मध्यप्रदेश से अलग होकर नए राज्य के रूप में नया आकार लिया इसके साथ हीं छत्तीसगढ़ राज्य के लागों का लम्बी समय से चली आ रही मांग भी पुरा हो गया।

     पृथक छत्तीसगढ़ के मांग:-

  •   पृथक छत्तीसगढ़ राज्य की मांग स्वतंत्रता के पूर्व से ही उठने लगी थी सबसे पहले सन् 1924 में रायपुर जिला परिषद् ने एक संकल्प पारित कर पृथक छत्तीसगढ़ राज्य बनाने की मांग की थी।
  •   इसके पुर्व इसके बाद सन, 1939 में जबलपुर के त्रिपुरी में कांग्रेस के अधिवेशन के दौरान पं. सुन्दरलाल शर्मा ने पृथक छत्तीसगढ़ निर्माण की बात रखी थी।
  •  आजादी या स्वतंत्रता के ठीक पहले 1946 में ठाकुर प्यारे लाल सिंह ने एं मंच स्थापित कर पृथक राज्य की मांग को गति दी।
  •   स्वतंत्रता के बाद सन्इ 1953 में जब राज्य पुनर्गठन आयोग का गठन हुआ तब इस इस आयोग के समक्ष पृथक छत्तीसगढ़ राज्य की मांग रखी गइ्रं।
  •   सन्1955 विधायक ंठाकुर रामकृष्ण सिंह ने तत्कालीन राज्य विघानसभा में पृथक छत्तीसगढ़ राज्य की मांग को रखा। इसके बाद विभिन्न स्थानों पर पृथक छत्तीसगढ़ राज्य के स्वर गुंजने लगे।
  •   1956 मं गठित छत्तीसगढ़ महासभा और 1967 मं गठित छत्तीसगढ़ भ्रांत संध इसी कड़ी के विस्तार थे।
  •   आपातकाल के दौरान श्रमिक नेता शंकर गुहा नियोगी ने पृथक छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के लिए अभियान चलाया तो 1983 में पृथक छत्तीसगढ़ पार्टी का गठन कर राजनैतिक फलक पर अलग राज्य की मांग को आधार देने का प्रयास किया गया।
  • पत्रकार और राज्य नेता चंदूलाल चंद्राकार ने सर्वदलीय छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण मंच का गठन कर अलग राज्य की मांग के समर्थन में महाबंद का आयोजन किया। इस मांग को लेकर 18 मार्च 1994 को तत्कालीन विधायक रविंन्द्र चैबे द्वारा मघ्यप्रदेश विधानसभा में अलग छत्तीसगढ़ राज्य बनाए जाने की मांग की दिशा में अशासकीय संकल्प प्रस्तुत किया गया था, जो राज्य विधानसभा के संकल्प सर्वानुमति से पारित हुआ।
  •   इसके बाद 25 मार्च 1998 को लोकसभा चुनाव के बाद अभिभाषण के संसद के दोनो सदनों केा संबाधित करने हुए के.आर. नारायणन ने अभिभाषण में मध्यप्रदेश में से छत्तीसगढ़ राज्य बनाने के लिए कार्यवाही शुरू करने के संबंध में प्रतिबद्धता व्यक्त की ।
  •   लोकसभा में छत्तीसगढ़ संशोधन विधेयक 2000 प्रस्तुत किया गया।
  • 31 जुलाई 2000 को यह विधेयक राज्यसभा द्धारा घ्वनिमत से पारित कर दिया गया।
  •  9 अगस्त 2000 के यह विधेयक राज्यसभा द्वारा घ्वनिमत से पारित कर दिया गया
  •   विधेयक मे छत्तीसगढ़ के राज्यसभा सदस्यो की संख्या यथावत रखने संबंधी संशोधन के साथ राज्यसभा में घ्वनिमत से पारित विधेयक को लोकसभा में पुनः प्रस्तुत कर पांच मिनट  की समयावधि में मं परित कर , राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के लिए भेज दिया गया।
  •   विधेयक राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद भारत सरकार के राजपत्र में अधिनियम संख्या 28 के रूप मंे अधिसुचित किया गया।
  •   24 अगस्त 2000 केा पृथक छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना से संबंधित प्रशासनिक औपचारिकताएं पुरी करने के लिए राज्य शासन द्वारा छत्तीसगढ़ प्रकोष्ट का गठन कर दिया गया। इसके तहत 1 नवम्बर 2000 को छत्तीसगढ़ अस्तित्व में आया
  •   छत्तीसगढ़ अस्तित्व मे आने के समय राज्य में 16 जिलें रायपुर, धमतरी, महासंमुद, दुर्ग, राजनांदगांव, कवर्धा, बस्तर, दंतेवाड़ा, कांकेर, बिलासपुर, जांजगीर-चंापां, कोरबा, रायगढ़, जशपुर, अम्बिकापुर(सरगुजा), और कोरिया(बैकुण्ठपुर) और तीन राजस्व संभांग रायपुर, बिलासपुर, और बस्तर थे।
  •   उस समय छत्तीसगढ़ क्षेत्र में 11 लोकसभा ,90 विधानसभा,क्षेत्र थे।

  •   90 विधानसभा क्षेत्र में 44 क्षेत्र सामान्य , 34 अनुसुचित जनजाति और 10 अनुसुचित जाति के लिए सुरक्षित क्षेत्र थे।
  •   समय के साथ छत्तीसगढ़ राज्य मे 27 जिले हो गई हैं। लोकसभा और राज्य सभा क्षेत्र की संख्या यथावत है उसमे कोई परिवर्तन नहीं आया है।
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