छत्तीसगढ़ राज्य में महिलाओं की भुमीका |Role of women in Chhattisgarh state

छत्तीसगढ़ राज्य में महिलाओं की भुमीका |Role of women in Chhattisgarh state



छत्तीसगढ़ राज्य में महिलाओं की भुमीका


  • वर्ष 2001 की जनगणना में यह अनुपात 989 था।
  •  स्त्री-पुरूष लिंग अनुपात के मामलें में छत्तीसगढ़ का देश में पांचवा स्थान है।
  • 2011 की जनगणना के अनुसार छत्तीसगढ़ राज्य की कुल जनसंख्या 2,55,45,198 है। जिसमें पुरूष जनसंख्या 1,28,31,354 और महिला की संख्या 1,27,13,844 है।
  • राज्य की 13 जिलों में जशपुर(1005), राजनांदगांव(1015), महासंमुद(1017) , धमतरी (1010), कांकेर (1006) ,बस्तर (1017) ,दंतेवाड़ा(1023) ,बलौदाबाजार (1004), गरियाबंद (1020), बालोद (1022), बेमेतरा (1001) , कोंडागांव (1033) , सुकमा (1017)  का स्त्री -पुरूष अनुपात 1000 से अधिक है।
  • सबसे अधिक स्त्री-पुरूष अनुपात कोंडागांव जिले की 1033 है इसके बाद दंतेवाड़ा 1023 तथा इसके बाद बालोद का 1022 है।
  • सबसे कम स्त्री-पुरूष अनुपात रायपुर जिले की 963 दर्ज किया गया है।
  • इसी तरह स्त्राी साक्षरता में छत्तीसगढ़ राज्य में दुर्ग जिला सबसे आगे रहा ।
  • दुर्ग जिला में महिला साक्षरता का प्रतिशत 70.51 था, इसके बाद धमतरी का 69.24 प्रतिशत था।
  • छत्तीसगढ़ मंे सबसे कम स्त्री साक्षरता दर बीजापुर जिले की 31.56 प्रतिशत रही थी।
  • स्त्री-पुरूष अनुपात के अलावा राज्य मंे 0 से 6 वर्ष वाले समूह की जनसंख्या 35,54,916 थी। जो वर्ष 2011 की जनगणना में बढ़कर 35,84,028 हो गई थी।
  • 2001 में यह आयु समूह कुल जनसंख्या का 17.12 प्रतिशत था , जो 2011 में कम होकर 14.03 प्रतिशत हो गया था।
  • सबसे अधिक कबीरधाम जिले में 17.12 प्रतिशत था, इसके बाद नारायणपुर में 16.29 और सरगुजा जिले में 15.75 प्रतिशत रहा। जबकि सबसे कम धमतरी जिले में 12.58 प्रतिशत दर्ज की गई।
  • छत्तीसगढ़ राज्य में महिलाओं की प्रशासनिक व्यवस्थाः-
  • छत्तीसगढ़ राज्य में महिलाओं एवं बच्चों की सर्वागीण विकास तथा उनके संवैधानिक हितो के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए विभिन्न कार्यक्रमों एवं योजनाआंे केा सुव्यवस्थित ढ़ंग से क्रियान्विन करने हेतु महिला एवं बाल विकास विभाग कार्यरत है।
  • विभाग के सबसे शीर्षपर मंत्रालय में विभगीय मंत्री/संसदीय सचिव और सचिव-सहआयुक्त और संयुक्त सचिव के साथ विभिन्न अधिकारी होते है।
  • इसके साथ ही सचालनालय के स्तर पर आयुक्त/संचालक के साथ, अपर संचालकों ,संयुक्त,उपसंचालकों और सहायक संचालकों के साथ अधिकारीयांे और कर्मचारियों का आमला होता है।
  • मैदानी स्तर पर संभागों और जिलों में विभाग को एक बड़ा अमला तैनात रहता है। इसके साथ ही विभाग के तहत राजस्तरीय संसाधन केन्द्र ,छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग,छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग, छत्तीसगढ़ महिला कोष, क्षेत्रीय महिला प्रशिक्षण संस्थान, बिलासपुर एवं जगदलपुर, नारी निकेतन (रायपुर,दंतेवाड़ा,सरगुजा) ,जिला स्तरीय कर्यालय , एकीकृत बाल विकास परियोजना, राज्य बाल संरक्षण समिति, राज्य दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण और जिला बाल संरक्षण इकाई कार्यरत है।
  • गतिविधियांः-

  • उपरोक्त उधेश्यों को प्राप्त करने के लिए कुपोषण मुक्ति अभियान के अन्तर्गत विभाग द्वारा कई गतिविधियां चल रहीं हैं।
  • इनमें परियोजना अधिकारी ,महिला पर्यवकक्षक, आंगनबाड़ी कार्यकत्र्ता एवं किशारी बालिकाओं का क्षमता वर्धन , 100 प्रतिशत शिश्ुाओं का वृद्धि अनुश्रवण, वृद्धि अनुश्रवण की नई प्रणाली का क्रियान्वयन, सुपोषण मेंलों का आयोजन, गंभीर कुपाषण शिशुओं को सुपाषण मेले में लाना एवं समुदाय आधारित संगठनों द्वारा ऐसे शिशुओं को गोद लिया जाए यह प्रयास करना,
  • कुपोषित शिश्ुाओं केा आवश्यक उपचार व दवाएं उपलब्ध कराना समुदाय स्तर पर पोषण एवं स्वस्थ्य दिवसों का सुदृढ़ीकरण करना है।

महिलाओं के लिए राज्य सरकार की विभीन्न योजनाएँः-


  • छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य में महिलाओं एवं बच्चों के लिए विभिन्न प्रकार की योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है।

  • इन योजनाओं के तहत यह प्रयास किया जा रहा है कि महिलाओं और बच्चों को अधिक से अधिक लाभ मिले ताकि विभाग का उधेश्य सफल हो सके। इन योजनाओं में मुख्यमंत्री में बाल संदर्भ योजना ,नवाजतन,सुपोषण चैपाल, महतारी जतन योजना, मुख्यमंत्री अमृत योजना , सबला योजना, किशोरी शक्ति योजना, इंदिरा गांधी मातृत्व सहयोग योजना, मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना, महिला जागृति शिविर, दिश दर्शन कार्यक्रम, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, नोनी सुरक्षा योजना,नवा बिहान योजना, आदि प्रमुक है।
  • संस्थाएं:-


राज्य सरकार द्वारा राज्य मे महिला बाल विभाग के अधीन कुछ संस्थाएं भी संचालित  की जा रही है ये संस्थाएं महिलाओं एवं बच्चों के विकास और स्वस्थ के साथ-साथ समाज की पीड़ित महिलाओं के लिए भी काम कर रही है।

1. नारी निकेतनः-


  • इस निकेतन में 16 वर्ष से ज्यादा आयु की अनाथ,विधवा, निराश्रित, तिरस्कृत,परित्यक्ता महिलाओं केा आश्रम व सहारा प्रदान करने तथा उनके निःश्ुाल्क परिपालन पुनर्वास के लिए छत्तीसगढ़़ मं तीन नारी निकेतनों का संचालन किया जा रहा है ।
  • यंे नारी निकेतन रायपुर,अम्बिकापुर एवं दंतेवाड़ा मंें संचालित है।
  • संस्थाओं में इन महिलाओं को निःश्ुाल्क आवास, भरण-पोषण , शिक्षण,प्रशिक्षण और पुनर्वास की व्यवस्था की जाती है।
  • वर्ष 2016-17 में दिसंबर 2016 तक 99 महिलाएं और 39 बच्चों ने संस्थाओें ने आश्रम सुविधा का लाभ ली।

2.कामकाजी महिलाओं के लिए महिला वसति गृहः-


  •   छत्तीसगढ़ राज्य में वर्तमान में 8 महिला वसति गृहों का संचालन स्वैच्छिक संगठनों के माध्यम से कया जा रहा है।
  • जनवरी 2011 में बिलासपुर शहर मं एक महिला वसति गृह के निर्माण /स्थापना की स्वीकृति प्राप्त हुई है। इसका भवन निर्माणाधीन है।
  • दिसंबर 2016 की स्थिति मं इन गृहों 189 महिलाएं निवासरत है।

3. स्वाधार गृह योजनाः-


  • संकटग्रस्त महिलाओं के आश्रम और सहायता सेवाएं प्रदाय करने के लिएय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय भारत सरकार के सहयोस से संचालित किए जा रहे है।
  • वर्तमान में बिलासपुर, कांकेर, एवं सरगुजा में उक्त गृह संचालित है।
  • दिसंम्बर 2016 की स्थिति में 76 महिलाएं निवासरत है। इस योजना में केन्द्र एवं राज्य का अंशदान 60ः40 का है।

4. उज्जवला गृह/योजनाः-


  • बच्चों तथ महिलाओं की ट्रैफिकिंग के निवारण तथा ट्रैफिकिंग और व्यावसायिक यौन शोषण की पीड़ित के बचाव, पुनर्वास और उन्हें समाज मे पुनः जोड़ने के लिए उज्ज्वला योजना प्रदेश में संचालित है।
  • भारत शासन द्वारा राज्य में बिलासपुर, कोरबा तथा कोरिया मंे स्वैच्छिक संगठनो को सरक्षण एवं पुनर्वास गृह संचालन की स्वीकृति प्रदान की गई है।
  • इसके अलावा रायपुर में स्वैछिक संगठन को रोकथाम एव बचाव के लिए परियोजना की स्वीकृति दी गई हैं।
  • महिलाओं की विभागीय आयोग एव बोर्डः- छत्तीसगढ़ राज्य में महिला एव बाल विकास विभाग के तहत निम्न विभागीय आयोग एवं बोर्ड है-

राज्य महिला आयोगः-


  • छत्तीसगढ़ में राज्य महिला आयोग का गठन 24 मार्च 2001 को किया गया।
  • महिला एवं बाल विकास विभाग अंतर्गत प्रदेश की महिलाओं को सशक्त बनाने , उनके हितों की देखभाल एव उसका संरक्षण करने , महिलाओं के प्रति वेदभाव मूलक व्यवस्था स्थिति और प्रावधानों को समाप्त करने हेतु पहल कर उसकी गरिमा व सम्मान सुनिशित करने हेतु  तथा हर क्षेत्र में महिलाओं को विकास के समान अवसर दिलाने, महिलाओं पर होने वाली अत्याचार ,अपराधों व त्वरित कार्यवाही करने के लिए प्रदेश में राज्य महिला आयोग का गठन किया गया है।

आयोग के कार्यः-

  • महिलावाओं के लिए संविधान तथा अन्य विधियों के अधिन उपबंधित संरक्षणों सं संबंधित समस्त मामलों का अन्वेषण तथा परीक्षण करना।
  • राज्य सरकार को वार्षिक रूप से तथा ऐसे अन्य समयों पर जैसे कि आयोग उचित समझे ,ऐसे संरक्षण को कार्यान्वयन के संबंध में रिपोर्ट प्रस्तुत करना है।
  • संविधान तथा अन्य विधियों में मं महिलाओं के संबंध में किए उपबंध के उल्लंघन के मामलों को समुचित प्राधिकारियों तक ले जाना।
  • महिलाओं के सामाजिक-आर्थिक विकास की योजना तैयार करने संबंधी प्रक्रिया में भाग लेना तथा सलाह देना।
  • ऐसे मुकदमेां को धन देना , जिसमें ऐसे मुद्दे आते है जो महिलाओं के विभिन्न समुम पर प्रभाव डालते है , राज्य महिला आयोग द्वारा समय≤ पर महिलाओं को लेकर अलग-अलग विषयों पर अध्ययन कार्य भी कराए जाते है। तथा जो अध्ययन कार्य आयोग द्वारा कराये जाते है वे इस प्रकार हैः-
  • महिलाओं के अध्ययन कार्यः-

  • राज्य की महिलाओं को आर्थिक, शैक्षणिक तथा स्वास्थ्य संबंधी स्थिति इसमें विशेषकर आदिवासी जिलों तथा ऐसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा , जो महिलाओं की साक्षरता ,मृत्यू दर तथा आर्थिक विकास की दृष्टि से कम विकसीत है या पिछड़ा हुआ क्षेत्र है।
  • वे परिस्थितियां जिसमें महिलाएं कारखानों ,स्थापनाओं, निर्माण स्थलों तथा वैसे ही अन्य स्थितियों में कार्य करती है और उक्त क्षेत्रों में महिलाओं की परिस्थिति में सुधार हेतु विशिष्ट रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार को सिफारिस करना।
  • राज्य में या चुने हुए क्षेत्रों में ,महिलाओं के विरूद्ध उन समस्त अपराधों की,जिनके अन्र्तगत महिलाओं की विवाह तथा दहेज ,बलात्कार, अपहरण, छेड़छाड़, महिलाओं के अनैतिक व्यापार से संबंधित मामले तथा प्रसव करवाने या नसबंदी करवाने के समय चिकित्सीय उपेक्षा, गर्भधारण या शिुशु जन्म से संबंधित चिकित्सीय हस्तक्षेप के मामले में समय≤ पर जानकारी संकलित करना।
  • महिलाओं के प्रति अत्याचारों के विरूद्ध संपूर्ण राज्य मंें या विनिर्दिष्ट क्षेत्रों में लेकमत जुटाने के लिए राज्य प्रकोष्ट और जिला प्रकोष्ट कोई आदि हों के साथ समन्वय करना जिससे ऐसे अत्याचारां संबंधी उपराध की शीघ्र रिपोर्ट की जाने तथा पता लगाये जाने और ऐसे अपराधों के विरूद्ध लोकमत जुटाने में सहायता मिलगी।
  • शिकायतें प्राप्त करनाः-

  • महिलाओं पर अत्याचार और महिलाओं के विरूद्ध अपराध ।
  • महिलाओं केा उनके न्यूनतम मजदुरी, प्राथमिक स्वास्थ्य और प्रसुति सुविधाओं से संबंधित अधिकारों से वंचित करना।
  • महिलाआंे के संबंध में राज्य सरकार ने नीतिगत विनिश्रयों का पालन न किया जाना।

  • परित्याक्ता और निराश्रित महिलाओं और वैश्यावृत्ति करने के लिए विवश की गई महिलाओं को पुनर्वास।
  • ऐसी महिलाओं पर जो अभिरक्षा में है अत्याचार और उन्हें समुचित उपचारी उपाय के लिए संबंद्ध प्राधिकारियों तक ले लाना।
  • निर्धन महिलाओं केा विविध परामर्श देने और ऐसी महिलाओं केा विविध सहायता प्राप्त करने में समर्थ बनाने के लिए राज्य के गैर सरकारी संगठनों केा सहायता करना, उनको प्रशिक्षित करना और प्रेरित करना।
  • किसी जेल , प्रतिपेषण गृह महिलाओं के संस्था या अभिरक्षा मं रखने के अन्य स्थानों केा , जहां महिलाओं केा कैदियों के रूप में या अन्यथा रखा जाता है
  • निरीक्षण करना या निरीक्षण करवाना आवश्यक समझा जाये तो उपचारी कार्यवाही के लिए संबद्ध प्राधिकारियों तक ले जाना।
  •  किसी अन्य ऐसे मामले के संबंध में कृत्यों का पालन करना जो कि राज्य सरकार द्वारा उसे निर्दिष्ट किया जाए।
  • छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोगः- इस विषय के बारे में अध्ययन ’’बच्चे’’  में विस्तार से किया गया है।
  • राज्य समाज कल्याण बोर्डः-

  • महिलाओं के कल्याण , विकास और सशक्तिकरण के लिए गैर सरकारी संगठनों के साथ सहभागिता एवं समाज कल्याण गतिविधियों केा बढ़ावा देने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ प्रदेश में राज्य समाज कल्याण बोर्ड गठन किया गया है।
  • राज्य शासन द्वारा राज्य समाज कल्याण बोर्ड के लिए इस राज्यांश के रूप में राशि 60.00 लाख रूपये का बजट प्रवधान रखा गया है
  • छत्तीसगढ़ महिला कोषः-
  • छत्तीसगढ़ महिला कोष द्वारा स्व-सहायता समुहों को आसान शर्त पर ़़ऋण उपलब्ध कराने के लिए ऋण योजना का संचालन 15 अगस्त 2003 से किया गया है।
  • योजनांतर्गत स्व-सहायता समूहों को उनकी बचत राशि का न्यूनता 4 से अधिकतम 10 गुना अथवा अधिकतम 50 हजार रूपए तक का ऋण प्रथम बार प्रदान किया जाता है।
  • तथा प्रथम बार प्रदाय ऋण की सफलतापूर्वक वापसी 2 लाख रूपए तक का ऋण द्वितीय बार में प्रदान किया जाता है।
  • योजना के अंन्तर्गत छत्तीसगढ़ महिला कोष द्वारा महिला स्व-सहायता समूह को 3 प्रतिशत साधारण वार्षिक ब्याज की दर पर उपलब्ध करया जाता है।
  • ऋण की वसूली आसान 24/26 मासिक किश्तों में होती है।

राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोगः-


  • इस विषय के बारे में अध्ययन बच्चे में विस्तार से।
  • राज्य समाज कल्याण बोर्डः- महिलाओं के कल्याण और सशक्तिकरण के लिए गैर सरकारी संगठनों के साथ सहभागिता एवं समाज कल्याण गतिविधियों केा बढ़ावा देन के उधेश्य से छत्तीसगढ़ प्रदेश मं राज्य समाज कल्याण बोर्ड का गठन किया गया।
  • छत्तीसगढ़ राज्य समाज कल्याण बोर्ड में अध्यक्ष के अतिरिक्त 18 सदस्यांे की नियुक्ति का प्रावधान है जिसमें से 9 सदस्य राज्य के द्वारा तथा 9 सदस्य केन्द्रीय समाज कल्याण बोर्ड द्वारा नामांकित किए जाते है।
  • बोर्ड का कार्यकाल 3 वर्षाें का होता है तथा अध्यक्ष के साथ ही बोर्ड का कार्यकाल समाप्त माना जाता है।

छत्तीसगढ़ में महिलाओं तथा बालिकाओं लिए संचालित आवासीय संस्थाओं में सुरक्षा एवं संरक्षण हेतु समेकित कार्ययोजनाः-


छत्तीसगढ़ राज्य में महिलाओं एवं बालिकाओं के लिए संचालित छात्रावास, आश्रम शाला एवं अन्य आवासीय संस्थाओं में महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए संस्थाओं के संचालन के लिए मानक मापदंडों का निर्धारण, पर्यवेक्षण एवं शिकायत निवारण की समुचित व्यवस्था हेतु समस्त कार्ययोजना लागु की गई है जो निम्न हैः-

1.महिलाओं  व बालिकाओं को आवासीय संस्थाओं मे सुरक्षित , भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराना

2.महिलाओं तथा बालिकाओं की आवासीय संस्थाओं के प्रबंधन एवं कार्यकारियों को महिलाओं /बालिकाओं की सुरक्षा एवं आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशील बनाना ।

3. महिलाओं एव बालिकाओं की सभी आवासीय संस्थाओं में मानक सुविधाएं उपलब्ध कराना।

4. महिलाआंे तथा तथा बालिकाओं की शिकायतों एव समस्याओं के निराकरण के लिए उत्तरदायी एवं संवेदनशील प्रशासनिक ढ़ांचा तैयरा करना।

5. इन आवासिय संस्थाओं के पर्यवेक्षण, निरीक्षण तथा अनुश्रवण की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करना।

6. महिलाओं एवं बालिकाओं के संरक्षण के लिए विद्यमान कानूनी प्रावधानों तथा विधिक सहायता पणाली का प्रभावी क्रियान्वयन।

7. महिलाओं/बालिकाओं के लिए विद्यमान प्रावधानों का सभी स्तरों पर व्यापक प्रचार-प्रसार कराना । इस कार्ययोजना में उपरोक्त उधेश्यों की पूर्ति के लिए विभिन्न कार्यवाहियों प्रस्तावित की गई है जैसे- आपातकालीन सहायता हेतु हेल्पलाइन की व्यवस्था, महिलाओं तथा बालिकाओं के लिए संचालित संस्थाओं में सुरक्षा व्यवस्था, सभी प्रकार के छात्रावासों ,कन्या आश्रमों एवं महिलााओं के आवासीय गृहों में आधारभूत व्यवस्था उपलब्द कराना तथा मानक मापदंड लागू कराया जाना , अंतःवासियों के लिए स्वास्थ्य एवं परामर्श सुविधा, संस्थाओं के निरीक्षण निगरानी एव अनुश्रवण की व्यवस्था आदि।


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