छत्तीसगढ़ में जेल |Prison in Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में जेल |Prison in Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में जेल की भूमिका

  • स्वतंत्रता के पूर्व वर्तमान छत्तीसगढ़ के इस भू-भाग पर के दौरान रायपुर में केन्द्रीय जेल तथा धमतरी ,महासमुंद, बलौदाबाजार ,गरियाबंद और देवभोग में पांच न्यायिक हवालतें बनाई थी या बनाई गई थी।
  • सन् 1862 में कारगर संगठन का एक नियमित स्थापना के रूप में गठन किये जाने पर यह निर्णय किया गया कि छोटे जिलों में सिविल सर्जन जिला अधिकारियों की अधीनस्थता में अपने जिले की जेलों के प्रशासनिक प्रभारी रहेंगे।
  • डाॅ. बेन्सले प्रथम अधीक्षक थे, जिन्होंने सन् 1862 में रायपुर जेल का प्रभार ग्रहण किया था।
  • उस समय इस जेलों में कुल 1636 कैदी थे। इसमें से 70 कैदी पढ़-लिख सकते थे।
  • 205 केवल पढ़ सकते थे तथा 150 कैदी शिक्षण प्राप्त कर रहे थे।
  • सन् 1862 में प्रथम बार एक जे महानिरीक्षक की नियुक्ति की गई 1862 में जेल की सुरक्षा के लिए तत्कालीन सना गार्डों के स्थान पर पुलिस गार्ड रखे गये।
  • रायपुर के केन्द्रीय जेल का निर्माण सन् 1862 में निर्माण कार्य श्ुारू किया गया तथा सन् 1868 में पूरा किया गया।
  • सन् 1874 की भारतीय ़जेल समिति की सिफारिशों के फलस्वरूप जेल के सामान्य  प्रबंध में सुधार किये गये। इसके अनुसार कैदियों यो के  रहने और उन्हें साफ-सुथरा खाना पानी देने की व्यवस्था की गई ।
  • सन् 1876 में पहली बार घटी हुई भोजन देने की व्यवस्था दी गई
  • 1 अप्रैल 1883 को सभी श्रेणी के कैदियों के लिए भोजन की पुनरीक्षित मात्रा लागू की गई।
  • सन् 1889 के अंत में भारत सरकार ने जेल में पुलिस के गार्डों  के स्थान पर वार्डन गार्डों को रखने की एक योजना को अनुमोदित किया। इस योजना का लक्ष्य जेल कर्मचारियों के वेतन में सुधार करना था।
  • जेल प्रबंध को पुनः व्यवस्थित रूप देने के लिए सन् 1890 में शुरू होने वाले दशक मं एक नया जेल मैन्युअल पुनः पुनरीक्षित किया गया तथा सन ् 1901 मं शासन के अनुमोदन से मध्यप्रान्त जेल मैन्युअल  के रूप मं उसका अविर्भाव हुआ।
  • सन् 1903 में कारागार संगठन मं एक मुख्य परिवर्तन यह हुआ कि जेल महानिरीक्षक  के पद का पुलिस से पृथक कर दिया गया। जिसके परिणामस्वरूप जेल प्रशासन में सुधार हुआ।
  • सन् 1922 में रायपुर केन्द्रीय जेल मे एक सलाहकार मंडल का गठन किया गया तथा लम्बी कैद वाले कैदियों की सजाओं का आकस्मिक मामले में सजा की आधी अवधि समाप्त होने पर तथा अभ्यस्त कैदियों के मामले में देा तिहाई अवधि समाप्त होने पर पुनरीक्षण किया गया।
  • सन् 1923 मंे रायपुर केन्द्रीय जेल का स्तर घटकर जिला जेल कर दिया गया
  • सन् 1938 मंे जेल विभाग में और सुधार किया गया। यहां दो महत्वपूर्ण अधिनियमितियां विशष रूप से उल्लेखनीय है। मघ्यप्रांन्त तथा बरार कारागार अधिनियम , 1939 जिसके द्वारा राजनैतिक कैदियों के लिए एक पृथक श्रेणी की मान्यता प्रदान की गई।
  • पहले अधिनियम को सन् 1940 में निरस्त कर दिया गया। सन् 1948 में और सुधार लागू किये गए जिसमें कैदियों को अच्छा भोजन, अच्छे कपड़े समय≤ पर मित्रों तथा रिश्तेदारों से मुलाकात पूणकालिन चिकत्सीय परिचर्ता तथा कैदियों के साथ सामान्यतः अच्छा व्यवहार करने की व्यवस्था थी।
  • उनके द्वारा सजाओं में छूट दने की प्रथा को भी उदार कर दिया गया और अर्जन योग्य कुल छूट सजा की अवधि को 1/4 से 1/3 कर दी गई।
  • शिक्षा सुधार मंे भी सुधार किया गया। देश की आजादी के बाद 1956 में हुए राज्यों के पुनर्गठन के बाद तत्कालीन संयुक्त मध्यप्रदेश मं एक जेल महानिरीक्षक की नियुक्ति की गई थी उसके बाद रायपुर केन्द्रीय जेल के तहत जिला जले बिलासपुर , जिला जेल जगदलपुर, उप जेल रायगढ़, उप जेल अम्बिकापुर, उप जेल बैकुंठपुर और उप जेल राजनांदगांव रखा गया था।
  • 2016-17 की स्थिति में छत्तीगसगढ़ राज्य में पांच केन्दीय  12 जिला और 16 उप जिलें स्थापित है।
  • 31 दिसंबर 2017 की स्थिति में राज्य की जेलों की कुल आवास क्षमता 12,321 थी। इसके विरूद्ध जेलों में 19,372 कैदी निरूद्ध थे। इनमें 8,482 दंडित कैदी थे वहीं विचाराधिन बंदियों की संख्या 10,850 थी। इसके अतिरिक्त अन्य बंदी 40 थे।
छत्तीसगढ़ में जेल |Prison in Chhattisgarh
छत्तीसगढ़ में जेल |Prison in Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ राज्य में जेलों की श्रेणी अनुसार विवरणः-

01. केन्द्रीय जेलः- इनकी संख्या पांच है:-

                 (1) रायपुर
                 (2) बिलासपुर
                 (3) जगदलपुर
                 (4) अंम्बिकापुर
                 (5) दुर्ग

02. जिला जेल:- इनकी संख्या  12 है।

                 (1) रायगढ़  (2)  जशपुर
                 (3) बैकुंठपुर (4)  कोरबा
                 (5) राजनांदगाव (6) दंतेवाड़ा
                 (7) महासमुंद    (8) जांजगीर
                 (9) धमतरी     (10) कांकेर
                 (11) कबीरधाम  (12) रामानुजगंज

03. उप जेल:-

 उप जेल की संख्या 16 है जो निम्न है- डोंगरगढ़, बेमेतरा ,संजरी बालोद, गरियाबंद, बलौदाबाजार, सुकमा, नारायणपुर, पेड्रारोड़, सूरजपुर, खैरागढ़, कटघोरा, मनेन्द्रगढ़ , सारंगढ़, सक्ती, बीजापुर, मुंगेली इत्यादि।

छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक व्यवस्थाः-

  • जेलों का नियन्त्रक विभाग , जेल विभाग, एव ंसुधारात्मक सेवाएं विभाग है।
  • सामान्य रूप से इसे जेल विभाग के नाम से जाना जाता है।
  • विभाग की प्रशासनिक व्यवस्था की शीर्ष पर मंत्री होते है।
  • मंत्रायल के स्तर पर मुख्य सचिव और अनुभाग अधिकारी होते हैं।
  • विभागाध्यक्ष के रूप में महानिदेशक , जेल एवं सुधारात्मक सेवाएं छत्तीसगढ़ होते है।उनके तहत विभाग का विस्तृत अमला  होता है।

Prison in Chhattisgarh

  • During this part of Chhattisgarh, presently before Independence, five judicial halts were made or made in Central Jail and Dhamtari, Mahasamund, Baloudabazar, Giriya Band and Devbhog in Raipur.
  • In 1862, when formed as a regular establishment of the effective organization, it was decided that in the small districts, civil surgeons would be the administrative charge of the district jails in the subordination of district officials.
  • Dr. Bensley was the first superintendent, who took charge of Raipur jail in 1862.
  • At that time there were a total of 1636 prisoners in the jails. Of this, 70 prisoners could read and write.
  • 205 could only read and 150 prisoners were receiving education.
  • For the first time in 1862, a Joint Inspector General was appointed, in 1862, police guards were kept in place of the then Sana Guards for the protection of the prison.
  • Construction of Central Jail of Raipur Construction work was started in 1862 and completed in 1868.
  • As per the recommendations of the Indian Judicial Committee of 1874, improving the general management of the prison. According to this, arrangements were made for the prisoners staying in Yooya and providing them clean water.
  • In 1876, arrangements were made for the first time reduced food
  • On April 1, 1883, the revised quantity of food was imposed for prisoners of all categories.
  • At the end of 1889, the Indian government approved a plan to keep guard guards in place of guard guards in the jail. The goal of this scheme was to improve the salary of prison staff.
  • A new prison was re-reviewed manually in the decade starting in 1890 and to get a re-arrangement of prison management, and in the year 1901, with the approval of the government, it became an intermediary gel manual.
  • A major change in the prison organization in 1903 was that the post of the Inspector General of Police was separated from the police. As a result, prison administration improved.
  • In 1922, a consultative board was formed in Raipur Central Jail and after the expiry of half the sentence in the casualty of the prisoners of the long imprisoned prisoners and in the case of habitants, the revision was done after the third term ended.
  • In 1923, Raipur central jail was reduced to district jail
  • In the year 1938, the prison department was further improved. Here are two important enactments in particular. Majy Prantant and Barar Prisons Act, 1939, which gave recognition to a separate category for political prisoners.
  • The first act was repealed in 1940. Further improvements were made in 1948 in which prisoners were given good food, good clothes, meeting with friends and relatives on time, full-time clinical awareness and generally good behavior with prisoners.
  • The practice of granting exemption to the sentence was also liberalized and the period of penalty earned was deducted from 1/4 to 1/3.
  • Improvement in Education Improvement After the restructuring of states after the independence of the country in 1956, a Jail Inspector General was appointed in the then Joint Madhya Pradesh, after which, under the Raipur Central Jail, District Jal Bilaspur, District Jail Jagdalpur, Sub jail Raigarh, Sub Jail Ambikapur, Sub jail Baikunthpur and sub jail Rajnandgaon were kept.
  • In the state of Chhattisgarh in the year 2016-17, five Central 12 districts and 16 sub districts are established.
  • In the state of December 31, 2017, the total housing capacity of the state jails was 12,321. In this case, 19,372 prisoners were condemned in prisons. There were 8,482 convicted prisoners while the number of convicted detainees was 10,850. Apart from this, the other detainees were 40.

Details of the range of prisons in Chhattisgarh State: -

01. Central Jail: - Five of them are: -

                 (1) Raipur
                 (2) Bilaspur
                 (3) Jagdalpur
                 (4) Ambikapur
                 (5) castle

02. District Jail: - Their number is 12.

                 (1) Raigarh (2) Jashpur
                 (3) Baikunthpur (4) Korba
                 (5) Rajnandgaon (6) Dantewada
                 (7) Mahasamund (8) Janjgir
                 (9) Dhamtari (10) Kanker
                 (11) Kabirdham (12) Ramanujganj

03. Sub jail:

  •  - The number of sub jail is 16, which is below- Donggargarh, Bemetara, Sanjrija Balod, Garia Band, Baloudabazar, Sukma, Narayanpur, PedroRod, Surajpur, Khairagarh, Katghora, Mannagargarh, Sarangarh, Shakti, Bijapur, Mungeli etc.
  • Administrative system in Chhattisgarh:
  • The Department of Jails is the Department of Controller General, Department of Jail, and Provincial Services.
  • Generally it is known as prison department.
  • There is a minister on top of the administrative system of the department.
  • There are Chief Secretaries and Section Officers at the level of the Ministry.
  • Dy. Director, Jail and Correctional Services are the Heads of Departments, Chhattisgarh. Under them, there is a detailed staffing of the department.

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